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गांधी को मारा जा सकता है गांधीवाद को नहीं

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Authore By Deepak yadav  महात्मा गांधी की विचारधारा   को गांधीवाद के नाम से जाना जाता है. महात्मा गाँधी उस उस व्यक्ति का नाम हैं, जो असत्य को सत्य से, हिंसा को अहिंसा से, घ्रणा को प्रेम से तथा अविश्वास को विश्वास से जीतने में विश्वास करते थे. भले ही आज गांधीजी नही हैं, लेकिन उनके विचारों, आदर्शों तथा सिद्धांतों के रूप में वे जिन्दा हैं. गाँधी के विचार क्रियात्मक योगदान में जितने उस समय प्रासंगिक थे, आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक बने हुए हैं. महात्मा गाँधी ने जनभावना को महत्व देकर और परम्परागत राष्ट्रवाद की विचार धरा में सुधार करते हुए, 21 वीं सदी के भारत के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया. महात्मा गाँधी ने विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्यों के द्वारा विभिन्न समुदायों के मध्य समन्वय स्थापित करने का कार्य किया. गांधीवाद की विचारधारा परम्परागत राष्ट्रवाद के’ विचारों से ऊपर उठकर थी. गांधी पूरे विश्व को अपना राष्ट्र मानते थे. वे भारतीय वैदिक परम्परा में कही गईं, बातों के अनुसार विश्व पूजन तथा माता भूमि पुत्रोः प्रथ्विया में विश्वास करते थे. मोहनदास करमचंद गाँधी ने संकटग...

निजीकरण से जनता को क्या नुकसान होगा

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Authore by Deepak yadav    किसी क्षेत्र या उद्योग के स्वामित्व को जब सरकारी हाथों से लेकर निजी हाथों में सौंपा जाता है, तब वह निजीकरण कहलाता है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी प्रदेश विशेष की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना होता है। हाल के दिनों में यह प्रयोग भारतीय रेलवे के साथ करने की भी कोशिशें हुई हैं, जिसने कुछ वर्गों को आक्रोशित करने का कार्य किया है, जबकि कुछ एक वर्ग सरकार के इस कदम से प्रभावित भी हुए हैं। देश की अर्थव्यवस्था से लेकर आम जन-जीवन को यह कैसे प्रभावित करेगा यह समझना ज़रूरी है। देश के लिए यह निजीकरण कितना अच्छा है या कितना बुरा है इसपर विचार करना आवश्यक है। 8 मई 1845 को स्थापित किया गया भारतीय रेलवे आज विश्व का  चौथा  सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है। भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा सहयोग इसी क्षेत्र का है परंतु आज सरकार को इस क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना बेहतर नज़र आ रहा है। इसकी शुरुआत हाल के दिनों में पूर्ण रूप से निजी कंपनी द्वारा चलाई गई तेजस एक्सप्रेस से हुई, जिसमें दिए गए सुख-सुविधाओं  कई लोग इस निजीकरण का कर रहे हैं विरोध इस बात की स...

किसान आंदोलन 2020 21

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Authore by Deepak yadav  सरकार सितंबर 2020 में तीन कृषि कानून लेकर आई ,  जैसे तैसे संसद में यह तीनों कानून पास हो गए हैं पर किसानों को यहां पसंद नहीं आए किसानों ने सरकार से आगाह किया कि इन तीनों कानूनों को रद्द कर दिया जाए वरना हम आंदोलन करेंगे सरकार ने उनकी बात नहीं मानी,  किसानों ने आंदोलन प्रारंभ किया किसान  दिल्ली की बॉर्डर पर जाकर खड़े हो गए पुलिस ने उन्हें वही रोक लिया खासकर इनमें से हरियाणा व पंजाब के किसान थे लगभग 6 महीने से चल रहे इस आंदोलन रहा था आखिरकार किसानों को इन कानूनों से क्या समस्या थी उनकी आंदोलन करने की क्या वजह थी किसानों का मानना था कि हमारी फसल मंडियों में नहीं बल्कि उद्योगपति खरीदेंगे वह भी मनमाने ढंग से,   मंडिया खत्म कर दी जाएगी इन कानून के बाद एमएसपी की गारंटी सरकार लिखित रूप में नहीं दे रही थी किसान चहा रहे थे कि इसकी गारंटी सरकार कानून में लिख कर दे एक समस्या यह भी है कि छोटे छोटे किसान जिलों में फसल नहीं भेज सकते थे तो वह दूसरे राज्यों में अपनी फसल लेकर कैसे जा सकते थे तथा किसी भी विवाद का न्याय क्षेत्र एसडीएम कार्य...

वो पुराना खत आज भी नई अलमारी में है

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  वो पुराना खत आज भी नई अलमारी में है ,  उम्मीद की एक किरण आज भी सूरज में है  वो खुशबू आज भी इन हवाओं में है  वो  पुराना खत आज भी नई अलमारी में है  आज भी स्याही नहीं सूखी उस खत की  अब तुम बताओ वो मजा whatsapp facebook की चैट में कहां है  , वो खत किताबों के बीच में है, कलम से लिखे गए वो अल्फाज आज भी दिल में है  सिलवटें पड़ गई तेरी लिखावट के उस कागज में , फिर भी मैंने उससे आज तक संभाल कर रखा है  और तुझे कैसे बताएं वो  खत अलमारी में छुपा के रखा है ,  जब रुक गया था एक पल के लिए , जिंदगी थम गई थी एक पल के लिए,  फिर तेरे उस कागज के टुकड़े से शुरूर  आया उम्र भर के लिए , आओ हमारी महफिल में तुम्हें भी बताएंगे कैसे हमने पुराना खत नई अलमारी में सजा के रखा है यह भी दिखायेंगे चलो अब छोड़ो तुम थोड़ी मानोगी की  वो पुराना खत आज भी नई अलमारी में है  ✍️✍️✍️,,,,,Deepak७102

वर्तमान में मीडिया की भूमिका क्या है ?

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Authore Deepak yadav लोकतंत्र में तीन स्तंभ होते हैं कार्यपालिका विधायिका और न्यायपालिका और तीनों पर नजर रखने का काम होता है लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया का के वर्तमान समय में यहां काम मीडिया कर रहा है कि मीडिया अपनी भूमिका निभा रहा है वर्तमान में तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता आज मीडिया एक एजेंडे के साथ काम करता है जनहित से संबंधित समस्या को तो भूल ही गया है उसे बस टीआरपी की चिंता है मीडिया में बस अब पत्रकारिता नहीं देखी जाती उसे मात्र टीआरपी की भूख बिकती है और यहां बहुत चिंता की बात थी देश में भयंकर बेरोजगारी है इन देश में भयंकर कोरोना महामारी है देश की जीडीपी सबसे निचले पायदान पर हैं देश में भयंकर भुखमरी है एक गरीब किसान परेशान हैं सरकार और मीडिया इस पर बात तक नहीं करती है आपातकाल के समय भी मीडिया ऐसे ही सरकार के सामने झुक गया था और लोगों को भी लगता है कि मीडिया वर्क में भूमिका नहीं निभा रहा है आज के प्राइमटाइम में हिंदू मुसलमान पर बहस चलती है कहीं तो नोटों में चीज की खोज करते हैं तो कई अंधविश्वास फैलाते हैं पर जनता की समस्या इनको नहीं दिखती है एक नहीं हर मुद्दे पर लगभग मीडिया की भू...

क्या है राष्ट्रवाद और कौन है राष्ट्रवादी

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Authore by Deepak yadav  क्या है राष्ट्रवाद और कौन है राष्ट्रवादी भारत में यह बहस का मुद्दा है यह वर्तमान परिस्थितियों में हर कोई राष्ट्रवादी बना हुआ है क्या नारे लगाना ही राष्ट्रवाद बन गया है भारत में वर्तमान स्थिति में नारे लगाना ही राष्ट्रवाद बन गया है भारत एक बहु सांस्कृतिक देश है जिसमें अनेक लोग निवास करते हैं अपनी भाषा अपनी संस्कृति अपने लिबास के कारण लोग जाने पहचाने जाते हैं आज की स्थिति में हर कोई राष्ट्रवादी बन गया है और बनना भी चाहिए परंतु राष्ट्रवाद की परिभाषा कुछ लोगों ने थोड़ी सी बदल दी है अगर कोई व्यक्ति उसकी विचारधारा की विपरीत बोलता है तो उसे देशद्रोही कहा जाता है    राष्ट्रवाद सिर्फ नारे लगाना नहीं है ना ही अपने आप को देश प्रेमी बताना है देश से प्रेम तो सभी करते हैं आज की युवा पीढ़ी अब व्हाट्सएप पर स्टेटस डालने को ही राष्ट्रभक्ति समझती हैं और अपने आप को राष्ट्रवादी समझती है बल्कि सही मायने में वह राष्ट्रवादी है जो देश की सेवा करता हो चाहे वह किसी भी रूप में हो राष्ट्रवाद का मतलब यह नहीं की कले में गमछा डाल कर भारत माता के नारे लगाना राष्ट्रवाद...

गांधी एक विचार

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  Authore by Deepak yadav इनके बारे में बहुत पढ़ा होगा पर आज हम इनके जीवन 5 ऐसी अनसुनी घटना बताएंगे महात्मा गांधी  इनको अपनी  अहिंसक विचारधारा के कारण विश्व भर में जाना पहचाना जाता है  वैसे तो आपने उनके बारे में किताबों में सोशल मीडिया में  बहुत सुना होगा पर इनके कुछ ऐसे अनसुने किस्से थे  जो कहीं दब गए  आपने सोशल मीडिया में इनके बारे में  बहुत उल्टा सीधा भी सुना होगा  पर इनमें  सच्चाई कुछ और ही है बापू इस देश का विचार वह विचार  जो अपनी अहिंसक विचारधारा के कारण  भारत  को आजाद कराने का संकल्प लिया था वह गांधी जिसने विश्व भर में अपनी विचारधारा  को  प्रचलित किया  वह गांधी जो दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद के कारण  लड़ा  वह गांधी जिसने त्याग समर्पण  से अपने जीवन  में उतारा ऐसे ही बाबू  के 5 किस्से हैं  1. बापू रोज 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते थे 2. एक बार बाबू ट्रेन में यात्रा कर रहे थे तभी उनका एक जूता नीचे गिर गया तो उन्होंने दूसरा जूता भी फेंक दिया तभी एक व्यक्ति ने उनस...